Wednesday, June 24, 2026

⚡ रजस-तामस कर्मों का फल: भगवद्गीता अध्याय 17 श्लोक 15 का संदेश 📖 भगवद्गीता अध्याय 17 – श्रद्धात्रयविभागयोग


श्लोक 15


🕉️ संस्कृत श्लोक (देवनागरी)

रजस्तमं पापं तु कामात्त्यागाच्च फलं लभेत् ।
अज्ञानात्सेवते कामं दम्भाद्धानं तथा रजः ॥15॥


🔤 IAST Transliteration

rajas-tamaṁ pāpaṁ tu kāmāt tyāgāc ca phalaṁ labhet |
ajñānāts evate kāmaṁ dambhāddhānaṁ tathā rajaḥ ||15||


🇮🇳 हिंदी अनुवाद

रजस और तामस गुणों से प्रेरित पाप कर्म केवल काम और त्याग से फल प्राप्त करते हैं।
अज्ञान और दंभ से प्रेरित कर्म, जैसे केवल धन के लिए या दिखावे के लिए किया गया कार्य, रजस गुण का है।


🇬🇧 English Translation

Actions driven by rajasic-tamasic qualities are sinful and yield results only when performed for desire or renunciation.
Actions performed out of ignorance or hypocrisy, such as for wealth or show, are also rajasic in nature.


🧠 विस्तृत हिंदी व्याख्या

श्लोक 15 में श्रीकृष्ण ने रजस-तामस कर्मों के वास्तविक स्वरूप और परिणाम को स्पष्ट किया है।
यह श्लोक बताता है कि जो कर्म अहंकार, लालच, दंभ या अज्ञान से प्रेरित हैं, उनका कोई स्थायी या पुण्य फल नहीं होता।


1️⃣ रजस्तमं पापं

  • रजस-तामस कर्म:

    • स्वार्थ, कामना और क्रोध से प्रेरित कर्म

    • तामस गुण वाले कर्म: आलस्य, अज्ञान और असत्य से प्रेरित

  • ऐसे कर्म केवल क्षणिक सुख या लाभ दे सकते हैं, स्थायी पुण्य या मोक्ष नहीं


2️⃣ कर्म का फल

  • कामात्त्याग: केवल इच्छाओं के अनुसार किया गया त्याग या कर्म

    • इससे अस्थायी फल मिलता है, स्थायी आध्यात्मिक लाभ नहीं

  • अज्ञानात्सेवते कामं: अज्ञान और दंभ से किया गया कार्य

    • उदाहरण: केवल दिखावे के लिए दान, या केवल धन के लिए पूजा

  • ये सभी रजस गुण के कर्म हैं और अस्थायी, असफल और अहितकारी हैं


🔑 श्लोक का संदेश

  • कर्म का गुण और उद्देश्य उसका वास्तविक फल तय करता है

  • स्वार्थ, लालच, दंभ और अज्ञान से प्रेरित कर्म केवल रजस-तामस फल देते हैं

  • सच्चा पुण्य और स्थायी लाभ सात्विक, ज्ञानयुक्त और निःस्वार्थ कर्म से प्राप्त होता है


🌍 Detailed English Explanation

Verse 15 emphasizes the limitations of rajasic-tamasic actions:

  • Rajasic-tamasic actions are driven by desire, ego, hypocrisy, or ignorance.

  • Such actions may yield temporary material gain but not spiritual progress or lasting virtue.

  • Krishna highlights that only selfless, sattvic actions, motivated by devotion and knowledge, produce enduring spiritual benefits.

  • Actions performed solely for wealth, prestige, or personal gain belong to the rajasic category and are ultimately unfruitful.


🌱 जीवन के लिए सीख (Life Lessons)

✅ हिंदी में

  • स्वार्थ और लालच से प्रेरित कर्म सिर्फ क्षणिक सुख देते हैं

  • दिखावे और अहंकार से किया गया कार्य स्थायी पुण्य नहीं लाता

  • कर्म करते समय निःस्वार्थ भाव, श्रद्धा और ज्ञान आवश्यक है

  • सात्विक कर्म ही स्थायी सफलता, शांति और मोक्ष प्रदान करते हैं

✅ In English

  • Actions driven by ego and desire yield only temporary satisfaction

  • Acts done for show or hypocrisy bring no lasting virtue

  • Perform actions with selflessness, devotion, and knowledge

  • Sattvic actions lead to enduring success, peace, and liberation


🕯️ निष्कर्ष (Conclusion)

भगवद्गीता अध्याय 17 श्लोक 15 यह स्पष्ट करता है कि रजस-तामस कर्म केवल क्षणिक लाभ और कामना को पूरा करते हैं, लेकिन स्थायी पुण्य और मोक्ष नहीं देते।
श्रीकृष्ण हमें बताते हैं कि सच्चा फल केवल सात्विक, ज्ञानयुक्त और निष्काम कर्म से प्राप्त होता है।

🌸 स्वार्थ और दंभ से दूर रहें, निःस्वार्थ और सात्विक कर्म करें—यही सच्ची आध्यात्मिक सफलता है।


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