📜 संस्कृत श्लोक (देवनागरी)
महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा ।
मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः ॥6॥
🔤 IAST Transliteration
maharṣayaḥ sapta pūrve catvāro manavas tathā |
mad-bhāvā mānasā jātā yeṣāṁ loka imāḥ prajāḥ ||6||
🪔 हिंदी अनुवाद
प्राचीन सात महर्षि और चार मनु,
मेरे ही भाव से, मेरे मन से उत्पन्न हुए हैं;
और इन्हीं से इस लोक की समस्त प्रजा उत्पन्न हुई है।
🌍 English Translation
The seven great sages of ancient times
and the four Manus
were born from My mind, endowed with My nature;
from them all the living beings in this world have descended.
📖 विस्तृत हिंदी व्याख्या
भगवद गीता अध्याय 10 का यह छठा श्लोक हमें सृष्टि की आध्यात्मिक वंशावली (Spiritual Lineage) से परिचित कराता है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि संपूर्ण मानव जाति और सामाजिक व्यवस्था का मूल स्रोत वही हैं।
🔹 सप्त महर्षि कौन हैं?
वैदिक परंपरा के अनुसार, ये सात महान ऋषि (सप्तर्षि) हैं:
मरीचि
अत्रि
अंगिरा
पुलस्त्य
पुलह
क्रतु
वसिष्ठ
ये ऋषि केवल तपस्वी नहीं थे, बल्कि ज्ञान, धर्म और सृष्टि-नियंत्रण के वाहक थे।
🔹 चार मनु कौन हैं?
मनु मानव समाज के आदि विधाता और शासक माने जाते हैं।
मनु ही मनुष्य शब्द का मूल हैं।
मनु समाज को:
नियम
धर्म
कर्तव्य
शासन व्यवस्था
देने वाले माने जाते हैं।
🔹 “मानसा जाता” – मन से उत्पन्न
यहाँ सबसे महत्वपूर्ण शब्द है “मानसा”।
इसका अर्थ है — शरीर से नहीं, मन से उत्पन्न।
भगवान स्पष्ट करते हैं कि:
👉 ऋषि और मनु किसी भौतिक प्रक्रिया से नहीं,
👉 बल्कि ईश्वरीय चेतना से उत्पन्न हुए।
🔹 “मद्भावा” – मेरे ही स्वरूप से
इन महर्षियों और मनुओं में जो ज्ञान, विवेक और धर्म था,
वह भगवान के ही भाव का प्रतिबिंब था।
इसका अर्थ यह है कि:
सच्चा धर्म मानव-निर्मित नहीं
बल्कि ईश्वर-प्रेरित है
🔹 “येषां लोक इमाः प्रजाः”
इन ऋषियों और मनुओं से ही:
मानव जाति
समाज
सभ्यता
संस्कृति
का विकास हुआ।
यह श्लोक यह भी सिखाता है कि हम सभी ईश्वर की ही चेतना की संतान हैं,
इसलिए भेदभाव, अहंकार और घृणा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
📘 Detailed English Explanation
This verse outlines the divine origin of human civilization.
Krishna explains that:
The ancient seven sages (Saptarishis)
The four Manus, progenitors of mankind
were born directly from His mind, not through physical means.
This signifies that:
Dharma is divinely inspired
Human order has spiritual roots
Society is meant to function in alignment with cosmic law
By stating that all living beings descend from these sages and Manus, Krishna establishes the unity of humanity under divine consciousness.
🌱 जीवन के लिए शिक्षाएँ (Life Lessons)
🔸 हिंदी में
मानव जाति की जड़ आध्यात्मिक है, भौतिक नहीं
सच्चा धर्म ईश्वर से उत्पन्न होता है
हम सभी एक ही दिव्य चेतना से जुड़े हैं
अहंकार और भेदभाव अज्ञान का परिणाम हैं
समाज का उद्देश्य धर्म और कल्याण होना चाहिए
🔸 In English
Humanity has a divine origin
Dharma is spiritually rooted
All beings share one cosmic source
Ego and division arise from ignorance
Society should align with higher values
🔔 निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद गीता अध्याय 10 श्लोक 6 हमें यह स्मरण कराता है कि
हम केवल शरीर नहीं, बल्कि एक दिव्य परंपरा की कड़ी हैं।
ऋषि, मनु और मानव —
सभी की उत्पत्ति भगवान श्रीकृष्ण की चेतना से हुई है।
जब हम यह समझ लेते हैं,
तब जीवन में विनम्रता, करुणा और उत्तरदायित्व स्वतः आ जाता है।
यही विभूति योग का उद्देश्य है —
सृष्टि में ईश्वर की निरंतर उपस्थिति को पहचानना।