श्लोक 11
🕉️ संस्कृत श्लोक (देवनागरी)
अज्ञानवृत्तिः कामश्च क्रोधश्च रजस्तमः प्रियम् ।
सर्वं रजस्तमसं चैव न कर्म फलं भवति ॥11॥
🔤 IAST Transliteration
ajñāna-vṛttiḥ kāmaś ca krodhaś ca rajas-tamaḥ priyam |
sarvaṁ rajas-tamasaṁ caiva na karma phalaṁ bhavati ||11||
🇮🇳 हिंदी अनुवाद
अज्ञान, काम और क्रोध से प्रेरित रजस और तामस कर्म प्रिय होते हैं,
लेकिन इस प्रकार के कर्मों से कोई वास्तविक फल या आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता।
🇬🇧 English Translation
Actions born of ignorance, desire, and anger, which are rajasic or tamasic, may appear appealing,
but such actions yield no real result or spiritual benefit.
🧠 विस्तृत हिंदी व्याख्या
श्लोक 11 में श्रीकृष्ण ने रजस-तामस कर्मों की असफलता और नुकसान स्पष्ट किया है।
यह श्लोक बताता है कि यदि कर्म अहंकार, लालच, क्रोध और अज्ञान से प्रेरित हैं, तो वे स्वार्थी और असफल हैं, और आत्मा को उन्नति नहीं देते।
1️⃣ अज्ञानवृत्तिः, काम, क्रोध — रजस-तामस प्रेरक
अज्ञानवृत्तिः: अज्ञान, मिथ्या विचार और अधूरी जानकारी
काम: असत्य इच्छाओं और लालच से प्रेरित क्रियाएँ
क्रोध: ईर्ष्या, द्वेष और क्रोध से प्रेरित कर्म
ये तीनों रजस और तामस गुणों से जुड़े हुए हैं, जो व्यक्ति को बंधनों और दुःख की ओर ले जाते हैं।
2️⃣ न कर्म फलं भवति — परिणामहीनता
ऐसे कर्म स्वार्थी और अहंकार से प्रेरित होते हैं, इसलिए उनका कोई स्थायी फल या आध्यात्मिक लाभ नहीं होता।
बाहरी दुनिया में ये कर्म क्षणिक सुख या लाभ दे सकते हैं, लेकिन सच्ची शांति, पुण्य या मोक्ष नहीं।
🔑 श्लोक का संदेश
काम, क्रोध और अज्ञान से प्रेरित कर्म निष्फल और अशुभ होते हैं।
व्यक्ति को अपने कर्म सात्विक गुण, ज्ञान और भक्ति से प्रेरित करने चाहिए।
केवल सात्विक और निष्काम कर्म ही जीवन में स्थायी फल, पुण्य और मोक्ष देते हैं।
🌍 Detailed English Explanation
Verse 11 emphasizes the ineffectiveness of rajasic and tamasic actions:
Actions motivated by ignorance, desire, and anger may seem attractive but are ultimately fruitless.
Rajasic-tamasic actions are selfish, ego-driven, and binding, offering no real spiritual benefit or liberation.
Krishna highlights that only sattvic, knowledge-based, and selfless actions yield lasting results, inner peace, and spiritual progress.
🌱 जीवन के लिए सीख (Life Lessons)
✅ हिंदी में
लालच, क्रोध और अज्ञान से प्रेरित कर्म कभी स्थायी फल नहीं देते
ऐसे कर्म आध्यात्मिक उन्नति में बाधक होते हैं
अपने कर्मों को सात्विक गुण, ज्ञान और भक्ति से प्रेरित करें
निष्काम, सात्विक कर्म ही जीवन को पुण्य और मोक्ष की ओर ले जाते हैं
✅ In English
Actions motivated by desire, anger, and ignorance bear no lasting fruit
Such actions hinder spiritual progress
Align your actions with sattvic qualities, knowledge, and devotion
Selfless, sattvic actions lead to virtue, peace, and liberation
🕯️ निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद्गीता अध्याय 17 श्लोक 11 यह स्पष्ट करता है कि रजस और तामस गुणों से प्रेरित कर्म केवल क्षणिक सुख दे सकते हैं, लेकिन स्थायी फल या आध्यात्मिक लाभ नहीं देते।
श्रीकृष्ण हमें बताते हैं कि सात्विक, ज्ञानयुक्त और निष्काम कर्म ही जीवन में सफलता और मोक्ष की कुंजी हैं।
🌸 अज्ञान, लालच और क्रोध से बचें, सात्विक गुणों और भक्ति से प्रेरित कर्म करें।