📜 संस्कृत श्लोक (देवनागरी)
द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् ।
जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम् ॥36॥
🔤 IAST Transliteration
dyūtaṁ chalayatām asmi tejas tejasvinām aham |
jayo ’smi vyavasāyo ’smi sattvaṁ sattvavatām aham ||36||
🪔 हिंदी अनुवाद
मैं जुआ खेलने वालों की चाल,
शक्तिशाली व्यक्तियों का तेज,
मैं ही विजय, परिश्रम, और
सत्त्व वाले व्यक्तियों का सत्त्व हूँ।
🌍 English Translation
I am the gambling of those who gamble,
the brilliance of the brilliant,
victory, determination,
and the goodness (Sattva) of the virtuous.
📖 विस्तृत हिंदी व्याख्या
भगवद गीता अध्याय 10 श्लोक 36 में
श्रीकृष्ण अपनी दिव्यता और गुणों में सर्वव्यापकता का वर्णन करते हैं।
द्यूतं छलयतामस्मि – जो लोग जुआ खेलते हैं या छल करते हैं, उसमें मेरी उपस्थिति है
तेजस्तेजस्विनामहम् – सभी शक्तिशाली और तेजस्वी व्यक्तियों का तेज
जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि – विजय और परिश्रम में मेरी उपस्थिति
सत्त्वं सत्त्ववतामहम् – सत्त्व गुण वाले व्यक्तियों के भीतर सत्त्व की प्रवृत्ति
श्रीकृष्ण बताते हैं कि सभी जीवन में विजय, शक्ति, परिश्रम और सत्त्व उनके द्वारा संचालित हैं।
यह श्लोक भक्तों को ईश्वर की सर्वव्यापकता, गुण और शक्ति का अनुभव कराता है।
🔹 1. “द्यूतं छलयतामस्मि” – खेल और चाल
भगवान कहते हैं कि जो लोग जुआ और छल में संलग्न हैं, उसमें मेरी उपस्थिति है
यह दर्शाता है कि ईश्वर सभी कर्म और मानव प्रवृत्तियों में व्याप्त हैं।
🔹 2. “तेजस्तेजस्विनामहम्” – शक्ति और प्रभाव
तेजस्वी = शक्तिशाली और प्रभावशाली व्यक्तियों का तेज
भगवान कहते हैं कि सभी शक्ति और प्रभाव उनकी देन है
यह सिखाता है कि सफलता और प्रतिभा का स्रोत भगवान हैं।
🔹 3. “जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि” – विजय और परिश्रम
जयो = विजय, व्यवसायो = परिश्रम
भगवान कहते हैं कि सभी विजय और प्रयास में मैं हूँ
यह दर्शाता है कि सफलता और उपलब्धियों में ईश्वर का मार्गदर्शन आवश्यक है।
🔹 4. “सत्त्वं सत्त्ववतामहम्” – सत्त्व और सद्गुण
सत्त्व = सद्गुण, सच्चाई और नैतिकता
भगवान कहते हैं कि सत्त्व गुण वाले व्यक्तियों के भीतर मेरी उपस्थिति है
यह दर्शाता है कि सद्गुण और नैतिकता की शक्ति भी भगवान की देन है।
📘 Detailed English Explanation
In this verse, Krishna emphasizes His presence in human abilities, efforts, and virtues:
In gambling or deceit: God’s presence exists even in human weaknesses.
In brilliance and power: The energy and talent of strong individuals originate from God.
In victory and perseverance: Success and determination reflect divine guidance.
In virtue (Sattva): Goodness in virtuous people comes from God.
This verse teaches that God is omnipresent in human strengths, efforts, victories, and virtues, making Him the source of both worldly and spiritual excellence.
🌱 जीवन के लिए शिक्षाएँ (Life Lessons)
🔸 हिंदी में
भगवान सभी मनुष्यों की शक्तियों और प्रयासों में व्याप्त हैं
विजय और परिश्रम में उनकी मार्गदर्शक भूमिका है
सत्त्व और सद्गुण उनकी देन हैं
सफलता और प्रतिभा के पीछे ईश्वर की कृपा है
भक्ति और सद्गुण से जीवन में स्थायी शक्ति और संतुलन आता है
🔸 In English
God pervades all human abilities and efforts
Victory and perseverance reflect divine guidance
Virtue and goodness stem from God
Success and talent are manifestations of divine grace
Devotion and virtue bring lasting strength and balance in life
🔔 निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद गीता अध्याय 10 श्लोक 36
भगवान की शक्ति, विजय, परिश्रम और सत्त्व में सर्वव्यापकता का उद्घाटन करता है।
सभी शक्तिशाली और तेजस्वी व्यक्तियों में उनकी उपस्थिति है
सभी विजय और मेहनत उनके मार्गदर्शन से संभव है
सत्त्व और सद्गुण उनकी देन हैं
यही विभूति योग का सार – ईश्वर की सर्वव्यापकता और गुणों का अनुभव
यह श्लोक भक्तों को सभी प्रयास, सफलता और गुणों में भगवान की उपस्थिति का अनुभव करने की प्रेरणा देता है।