📜 संस्कृत श्लोक (देवनागरी)
तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः ।
नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता ॥11॥
🔤 IAST Transliteration
teṣām evānukampārtham aham ajñāna-jaṁ tamaḥ |
nāśayāmy ātma-bhāva-stho jñāna-dīpena bhāsvatā ||11||
🪔 हिंदी अनुवाद
उन भक्तों पर करुणा करने के लिए
मैं स्वयं उनके हृदय में स्थित होकर
अज्ञान से उत्पन्न अंधकार को
ज्ञान के प्रकाशमय दीपक से नष्ट कर देता हूँ।
🌍 English Translation
Out of compassion for them,
I, dwelling within their hearts,
destroy the darkness born of ignorance
with the shining lamp of knowledge.
📖 विस्तृत हिंदी व्याख्या
भगवद गीता अध्याय 10 का यह श्लोक ईश्वर की करुणा का चरम रूप दर्शाता है।
पिछले श्लोक (10.10) में भगवान ने कहा कि वे भक्तों को बुद्धियोग प्रदान करते हैं।
अब इस श्लोक में वे बताते हैं कि वे स्वयं भीतर से अज्ञान का नाश करते हैं।
यह श्लोक तीन अत्यंत गहरे आध्यात्मिक सत्य प्रकट करता है।
🔹 1. “तेषाम् एव अनुकम्पार्थम्” – केवल करुणा से
भगवान स्पष्ट कहते हैं कि
👉 वे किसी लाभ, पूजा या दिखावे के कारण नहीं
👉 बल्कि केवल करुणा (अनुकम्पा) से यह करते हैं।
यह बताता है कि:
ईश्वर प्रेममय हैं
वे भक्त की कमजोरी को समझते हैं
और स्वयं सहायता के लिए आगे आते हैं
🔹 2. “अहम् आत्मभावस्थः” – मैं हृदय में स्थित हूँ
यह श्लोक यह सिद्ध करता है कि:
भगवान दूर नहीं हैं।
वे:
मंदिरों में ही नहीं
बल्कि हर जीव के हृदय में निवास करते हैं
जब भक्त सच्चे भाव से जुड़ता है,
तो भगवान अंतर्यामी रूप में मार्गदर्शन करने लगते हैं।
🔹 3. “अज्ञानजं तमः” – अज्ञान से उत्पन्न अंधकार
यहाँ “तमः” केवल बौद्धिक अज्ञान नहीं है।
यह है:
अहंकार
भ्रम
गलत आसक्ति
डर, मोह और वासना
भगवान कहते हैं—
मैं इस अंधकार को जड़ से मिटा देता हूँ।
🔹 4. “ज्ञानदीपेन भास्वता” – ज्ञान का प्रकाश
ईश्वर बाहर से ज्ञान नहीं थोपते,
बल्कि भीतर ज्ञान का दीपक जलाते हैं।
यह ज्ञान:
आत्मज्ञान है
विवेक है
सत्य को देखने की शक्ति है
जब यह दीपक जलता है:
भ्रम स्वतः समाप्त हो जाता है
सही और गलत स्पष्ट हो जाता है
जीवन दिशा पा लेता है
📘 Detailed English Explanation
This verse reveals God’s most compassionate promise.
Krishna says He personally:
Dwells in the heart
Removes ignorance
Illuminates knowledge
Ignorance is not destroyed by effort alone,
but by divine grace combined with devotion.
The “lamp of knowledge” represents:
Self-realization
Inner clarity
Liberation from illusion
This verse reassures devotees that
they are never alone on the spiritual path.
🌱 जीवन के लिए शिक्षाएँ (Life Lessons)
🔸 हिंदी में
ईश्वर करुणा से मार्ग दिखाते हैं
सच्ची भक्ति अज्ञान को मिटा देती है
आत्मज्ञान भीतर से उत्पन्न होता है
ईश्वर हर समय हमारे साथ हैं
अंधकार से लड़ने के लिए प्रकाश चाहिए, तर्क नहीं
🔸 In English
Divine grace removes ignorance
God works from within
Knowledge is illumination, not information
Devotion invites inner guidance
Compassion precedes enlightenment
🔔 निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद गीता अध्याय 10 श्लोक 11 यह सुनिश्चित करता है कि
जो भक्त प्रेम और समर्पण से भगवान से जुड़ता है, उसे अज्ञान में नहीं छोड़ा जाता।
भगवान स्वयं उसके हृदय में बैठकर:
भ्रम मिटाते हैं
ज्ञान का दीपक जलाते हैं
और सत्य की ओर ले जाते हैं
यह श्लोक भय, अकेलेपन और भटकाव को पूर्णतः समाप्त कर देता है।
यही विभूति योग का करुणामय रहस्य है।