📜 संस्कृत श्लोक (देवनागरी)
अथवा बहुनैतेन किं ज्ञातेन तवार्जुन ।
विष्टभ्याहमिदं कृत्स्नमेकांशेन स्थितो जगत् ॥42॥
🔤 IAST Transliteration
athavā bahunaitena kiṁ jñātena tvārjuna |
viṣṭabhyāham idaṁ kṛtsnam ekaṁśena sthito jagat ||42||
🪔 हिंदी अनुवाद
हे अर्जुन!
यदि तुम्हें मेरी कई दिव्य विभूतियाँ ज्ञात हो गई हैं, तो भी समझो कि
मैं इस सम्पूर्ण सृष्टि में एक अंश में ही समाहित हूँ।
🌍 English Translation
O Arjuna,
Even if you have known many of My divine manifestations,
understand that I am present in the entire universe in a single fragment.
📖 विस्तृत हिंदी व्याख्या
भगवद गीता अध्याय 10 श्लोक 42 में
श्रीकृष्ण अपनी सर्वव्यापकता और एकअंश में निवास का रहस्य उद्घाटित करते हैं।
बहुनैतेन किं ज्ञातेन – कई दिव्य विभूतियों को जान लेने के बावजूद
विष्टभ्याहम् कृत्स्नं – मैं सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त हूँ
एकअंशेन स्थितो जगत् – सभी प्राणी, पृथ्वी, जल, आकाश और जीवित-निर्जीव वस्तुएँ मेरे एक अंश में स्थित हैं
यह श्लोक दर्शाता है कि भगवान केवल दृष्टिगोचर रूपों में ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं।
यह भक्तों को ईश्वर की अद्वितीय सर्वव्यापकता और अनंत दिव्यता का अनुभव कराता है।
🔹 1. “बहुनैतेन किं ज्ञातेन” – अनेक दिव्य विभूतियाँ
अर्जुन ने कई दिव्य गुण और विभूतियाँ देखी हैं
भगवान कहते हैं कि सभी दिव्य गुणों के बावजूद भी मैं सम्पूर्णता में हूँ
यह सिखाता है कि ईश्वर की महिमा और दिव्यता केवल कुछ रूपों में सीमित नहीं है।
🔹 2. “विष्टभ्याहमिदं कृत्स्नम्” – सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त
भगवान कहते हैं कि संपूर्ण जगत मेरा अंश है
यह दर्शाता है कि प्रत्येक जीव, वस्तु और तत्व में भगवान की उपस्थिति है
भक्ति और ध्यान से हम इस सर्वव्यापकता का अनुभव कर सकते हैं।
🔹 3. “एकअंशेन स्थितो जगत्” – एकांश में निवास
एक अंश में रहना यह दर्शाता है कि भगवान का व्यापक रूप इतना विस्तृत है कि सभी में व्याप्त है
इससे यह समझ आता है कि ईश्वर सभी में व्याप्त हैं, परंतु एक हैं
यह श्लोक सृष्टि के एकत्व और ईश्वर की सर्वव्यापकता का ज्ञान कराता है
📘 Detailed English Explanation
In this verse, Krishna explains the omnipresence of God in the universe:
Multiple manifestations: Even if one has observed many divine forms,
Permeation of the whole: Krishna is present in the entirety of the universe,
Single fragment: The entire creation exists within a single fragment of His being.
This teaching highlights that God is omnipresent, and every particle of the universe reflects His divine essence.
It teaches devotees that no matter how vast creation appears, all exists within God’s singular, all-encompassing presence.
🌱 जीवन के लिए शिक्षाएँ (Life Lessons)
🔸 हिंदी में
भगवान सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं
सभी जीव, वस्तु और तत्व उनके अंश हैं
दिव्यता और भक्ति का अनुभव केवल बाहरी रूपों में नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि में है
ईश्वर की सर्वव्यापकता का बोध जीवन में विश्वास और श्रद्धा बढ़ाता है
ध्यान और भक्ति से हम उनके एकांश में सम्पूर्णता का अनुभव कर सकते हैं
🔸 In English
God is present in the entire universe
All beings and elements are parts of God
Divine experience is not limited to forms but exists throughout creation
Understanding God’s omnipresence enhances faith and devotion
Through meditation and devotion, we can experience the totality in God’s fragment
🔔 निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद गीता अध्याय 10 श्लोक 42
भगवान की सर्वव्यापकता और सम्पूर्ण सृष्टि में उनके एकअंश का निवास बताता है।
सभी दिव्य विभूतियों के बावजूद भगवान सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं
हर जीव और निर्जीव वस्तु उनके अंश से बनी है
यही विभूति योग का सार – ईश्वर की अनंत दिव्यता और सर्वव्यापकता का अनुभव
यह श्लोक भक्तों को सृष्टि के प्रत्येक अंश में भगवान की उपस्थिति और दिव्यता को पहचानने की प्रेरणा देता है।