📜 संस्कृत श्लोक (Devanagari)
अर्जुन उवाच
नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत ।
स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव ॥73॥
🔤 IAST Transliteration
arjuna uvāca
naṣṭo mohaḥ smṛtir labdhā tvatprasādān mayācyuta |
sthito ’smi gatasandehaḥ kariṣye vacanaṃ tava || 18.73 ||
🪔 हिंदी अनुवाद
अर्जुन ने कहा:
“हे अच्युत! मोह समाप्त हो गया है, स्मृति प्राप्त हुई है और आपकी कृपा मुझ पर बनी है।
अब मैं संदेह रहित होकर आपके वचन का पालन करूंगा।”
🌍 English Translation
Arjuna said:
“O Achyuta! My delusion is gone, my memory and understanding are restored, and your grace is upon me.
Now I am steadfast and free of doubt, and I shall act according to Your instructions.”
🧠 विस्तृत हिंदी व्याख्या (Detailed Hindi Explanation)
यह श्लोक अर्जुन का समाधान और स्पष्टता की प्राप्ति दर्शाता है।
🔸 “नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा”
नष्टो मोहः: मोह और भ्रम का नाश
स्मृतिर्लब्धा: स्मृति, समझ और बुद्धि का पुनः प्राप्त होना
अर्जुन बताता है कि भगवान की कृपा से उसके अंदर स्पष्टता, विवेक और आत्मबोध उत्पन्न हुआ है।
🔸 “त्वत्प्रसादान्मयाच्युत”
त्वत्प्रसादात्: आपकी कृपा से
मयाऽच्युत: मेरे ऊपर हे अच्युत (भगवान कृष्ण)
अर्थ: भगवान की कृपा ही मोह, भ्रम और संदेह का नाश करने वाली शक्ति है।
🔸 “स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव”
स्थितोऽस्मि: मैं दृढ़ स्थिति में हूँ
गतसन्देहः: अब कोई संदेह नहीं
करिष्ये वचनं तव: मैं आपके वचन का पालन करूंगा
संदेश: ईश्वर की कृपा और ज्ञान प्राप्ति से व्यक्ति संदेह से मुक्त होकर कर्म में निश्चय और समर्पण करता है।
🔸 आधुनिक जीवन में संदेश
आज:
लोग निर्णय लेने में अक्सर संदेह और भ्रम से प्रभावित होते हैं
गीता सिखाती है कि ईश्वर की कृपा और ज्ञान से व्यक्ति मोह और संदेह से मुक्त होता है
यह श्लोक निर्णय और आत्म-विश्वास का महत्व दर्शाता है
यह श्लोक जीवन में ईश्वर की कृपा, आत्म-विश्वास और संदेह रहित कर्म का संदेश देता है।
🌱 Detailed English Explanation
This verse highlights the transformation of the mind through divine grace.
🔹 Key Points
Destruction of delusion (Naṣṭo Mohaḥ)
Arjuna’s confusion and attachment vanish
Divine grace brings clarity, wisdom, and understanding
Restoration of memory and understanding (Smṛti Labdhā)
Memory, discernment, and intellect are restored through God’s grace
Highlights the importance of guidance and faith
Resolution to act (Kariṣye Vacanaṃ Tava)
Free from doubt, the devotee acts according to divine instructions
Demonstrates the power of faith, surrender, and decisive action
Modern relevance
In today’s world, doubt and confusion often paralyze decision-making
Gita teaches: Divine guidance and knowledge bring clarity, confidence, and focused action
🌼 जीवन के लिए शिक्षाएँ (Life Lessons)
🪔 हिंदी जीवन-पाठ
मोह और भ्रम का नाश
भगवान की कृपा से संदेह, भ्रम और मोह समाप्त होते हैं।
स्मृति और बुद्धि की प्राप्ति
ईश्वर की कृपा से आत्मज्ञान और स्पष्टता का विकास होता है।
निर्णय और कर्म में निश्चय
संदेह रहित मन कर्म में दृढ़ता और आत्मविश्वास लाता है।
ईश्वर पर विश्वास
भगवद गीता सिखाती है कि ईश्वर की कृपा से व्यक्ति मोह और संदेह से मुक्त होता है।
आध्यात्मिक और मानसिक शांति
संदेह और मोह न होने पर व्यक्ति आत्मिक और मानसिक रूप से स्थिर और शांत रहता है।
🌿 English Life Lessons
Destruction of delusion
Divine grace removes doubt, confusion, and attachment.
Restoration of intellect
God’s guidance develops clarity, discernment, and wisdom.
Confidence in action
A doubt-free mind brings determination and courage in action.
Faith in God
Faith and divine grace free one from confusion and illusion.
Spiritual and mental peace
A mind free from delusion attains inner stability and tranquility.
🔔 आधुनिक जीवन में श्लोक 18.73 की प्रासंगिकता
आज के समय में:
लोग अक्सर निर्णय और कार्य में संदेह के कारण पीछे हट जाते हैं
गीता सिखाती है कि ईश्वर की कृपा, मार्गदर्शन और ज्ञान प्राप्ति से व्यक्ति संदेह रहित होकर सही निर्णय और कर्म करता है
यह मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक दृष्टि से निर्णय क्षमता और आत्म-विश्वास बढ़ाता है
गीता का संदेश है:
ईश्वर की कृपा से मोह और संदेह का नाश होता है और भक्त अपने कर्मों में दृढ़ता और निश्चय प्राप्त करता है।
🧘♂️ निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद गीता का यह श्लोक स्पष्ट करता है कि:
ईश्वर की कृपा मोह और संदेह का नाश करती है
ज्ञान और श्रद्धा से व्यक्ति संदेह रहित होकर कर्म में निश्चय करता है
यह श्लोक आत्मिक स्पष्टता, निर्णय क्षमता और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है
गीता का संदेश है: मोह और संदेह से मुक्त होकर ईश्वर के वचन का पालन करना, आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति का मार्ग है।