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Tuesday, June 30, 2026

🌿 श्रद्धा और कर्म का फल: भगवद्गीता अध्याय 17 श्लोक 26 📖 भगवद्गीता अध्याय 17 – श्रद्धात्रयविभागयोग


श्लोक 26


🕉️ संस्कृत श्लोक (देवनागरी)

सत्त्वानुरूपे श्रद्धा हि कर्मासु फलदायिनी ।
रजस्तमो योनयः कामसङ्गे मूढः पापिनी ॥26॥


🔤 IAST Transliteration

sattvānurūpe śraddhā hi karmāsu phaladāyinī |
rajas-tamo yonayaḥ kāmasaṅge mūḍhaḥ pāpinī ||26||


🇮🇳 हिंदी अनुवाद

कर्मों में श्रद्धा व्यक्ति के गुणों के अनुसार फल देती है।
सात्विक श्रद्धा फलदायक होती है, जबकि रजस-तामस व्यक्ति केवल कामासक्ति में लिप्त रहता है और पाप करता है।


🇬🇧 English Translation

Faith (shraddha) in actions produces results according to the nature of one’s qualities.
Sattvic faith yields positive results, whereas a rajasic-tamasic person, attached to desires, performs sinful deeds.


🧠 विस्तृत हिंदी व्याख्या

श्लोक 26 में श्रीकृष्ण ने श्रद्धा और कर्म के फल का गुणों के अनुसार संबंध स्पष्ट किया है।


1️⃣ सात्विक श्रद्धा

  • कर्म सात्विक गुणों के अनुरूप होने पर

  • फल पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक

  • व्यक्ति को मोक्ष, ज्ञान और शांति प्राप्त होती है

2️⃣ रजस-तामस श्रद्धा

  • कामसङ्ग: केवल इच्छाओं और भोग के लिए कर्म

  • परिणाम: पाप और आत्मिक बंधन

  • मूढ़ व्यक्ति अज्ञान और मोह के कारण इन कर्मों में लिप्त रहता है


🔑 श्लोक का संदेश

  • श्रद्धा कर्मों में प्रेरणा और परिणाम उत्पन्न करती है

  • सात्विक श्रद्धा पुण्य और मोक्ष देती है

  • रजस-तामस प्रवृत्ति केवल पाप और दुःख देती है

  • जीवन में सात्विक श्रद्धा और गुण अपनाना अत्यंत आवश्यक है


🌍 Detailed English Explanation

Verse 26 highlights that faith (shraddha) in actions yields results according to the nature of one’s qualities:

  • Sattvic faith:

    • Leads to virtuous actions and positive outcomes

    • Brings spiritual growth, knowledge, and liberation

  • Rajasic-tamasic faith:

    • Motivated by desire and attachment

    • Leads to sinful deeds, bondage, and suffering

  • Krishna emphasizes that faith must be aligned with sattvic qualities for beneficial outcomes


🌱 जीवन के लिए सीख (Life Lessons)

✅ हिंदी में

  • कर्मों में सात्विक श्रद्धा अपनाएँ, ताकि फल पुण्य और मोक्षकारी हो

  • केवल कामासक्ति और स्वार्थ के लिए कर्म करना पाप का कारण बनता है

  • अपने जीवन में सात्विक गुण और श्रद्धा को प्राथमिकता दें

  • श्रद्धा और कर्म का सही मेल जीवन को सार्थक, शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से उन्नत बनाता है

✅ In English

  • Adopt sattvic faith in your actions for virtuous and liberating results

  • Actions motivated only by desire and attachment lead to sin

  • Prioritize sattvic qualities and faith in life

  • Proper alignment of faith and actions brings meaning, peace, and spiritual progress


🕯️ निष्कर्ष (Conclusion)

भगवद्गीता अध्याय 17 श्लोक 26 यह स्पष्ट करता है कि श्रद्धा का कर्म में स्वरूप और गुणों के अनुरूप फल निर्धारित करता है।
सात्विक श्रद्धा पुण्य और मोक्ष देती है, जबकि रजस-तामस श्रद्धा केवल कामासक्ति और पाप उत्पन्न करती है।

🌸 सात्विक श्रद्धा और गुण अपनाएँ, अपने कर्मों को पुण्य और मोक्षकारी बनाएँ।



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