📜 संस्कृत श्लोक (देवनागरी)
रुद्राणां शंकरश्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम् ।
वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम् ॥23॥
🔤 IAST Transliteration
rudrāṇāṁ śaṅkaraś ca asmi vitta-śo yakṣa-rakṣasām |
vasūnāṁ pāvakaś ca asmi meruḥ śikhariṇām aham ||23||
🪔 हिंदी अनुवाद
मैं रुद्रों में शंकर,
यक्ष और रक्षस्यों में वित्तेश (धन का देवता),
वसुओं में पावक (अग्नि),
और पर्वतों में मेरु का शिखर हूँ।
🌍 English Translation
Of the Rudras, I am Shankara;
of the Yakshas and Rakshasas, I am the lord of wealth;
of the Vasus, I am Agni (fire);
and of mountains, I am the summit of Meru.
📖 विस्तृत हिंदी व्याख्या
भगवद गीता अध्याय 10 श्लोक 23 में
श्रीकृष्ण अपने दिव्य स्वरूप और शक्तियों का वर्णन करते हैं।
रुद्र और शंकर – संहार और परिवर्तन की शक्ति
यक्ष और रक्षस्यों में वित्तेश – संपत्ति और धन की दिव्यता
वसु में पावक (अग्नि) – ऊर्जा, प्रकाश और शुद्धिकरण का प्रतीक
पर्वत और मेरु का शिखर – स्थिरता, शक्ति और सर्वोच्च स्थान
श्रीकृष्ण कहते हैं कि सभी शक्तियों और प्राकृतिक तत्वों में उनकी सर्वोच्च उपस्थिति है।
यह श्लोक हमें यह समझाता है कि ईश्वर न केवल जीवन में बल्कि प्राकृतिक और आध्यात्मिक शक्तियों में भी व्याप्त हैं।
🔹 1. “रुद्राणां शंकरश्चास्मि” – संहार और परिवर्तन में दिव्यता
रुद्र या शंकर = संहार और परिवर्तन के देवता
भगवान कहते हैं कि सभी संहार और निर्माण की शक्ति उनके अंदर है
यह दर्शाता है कि सृष्टि का क्रम और परिवर्तन भगवान के नियंत्रण में हैं।
🔹 2. “यक्षरक्षसाम् वित्तेशो” – धन और संपत्ति में प्रभुत्व
यक्ष और रक्षस = आभूषण, संपत्ति और रक्षा के देवता
भगवान स्वयं कहते हैं कि वे धन और समृद्धि के स्रोत हैं
यह सिखाता है कि संपत्ति और संसाधनों की वास्तविक शक्ति ईश्वर में है।
🔹 3. “वसूनां पावकश्चास्मि” – ऊर्जा और प्रकाश में दिव्यता
वसु = प्राकृतिक और अलौकिक तत्व
पावक (अग्नि) = ऊर्जा, जीवन शक्ति, और शुद्धिकरण
भगवान कहते हैं कि वे ऊर्जा और शक्ति का मूल हैं, जो जीवन और चेतना का आधार हैं।
🔹 4. “मेरुः शिखरिणामहम्” – पर्वतों में सर्वोच्चता
पर्वत = स्थिरता, शांति, शक्ति और धैर्य का प्रतीक
भगवान कहते हैं कि मेरु के शिखर के रूप में वे सभी पर्वतों में सर्वोच्च हैं
यह दर्शाता है कि ईश्वर स्थायित्व, आदर्श और सर्वोच्चता का आधार हैं।
📘 Detailed English Explanation
In this verse, Krishna explains His supremacy in various cosmic and spiritual domains:
Among Rudras: Shankara, representing destruction and transformation.
Among Yakshas and Rakshasas: Lord of wealth, representing prosperity.
Among Vasus: Agni (fire), symbolizing energy and purification.
Among mountains: Meru peak, representing stability and supremacy.
This verse illustrates that God pervades all aspects of creation, including energy, wealth, stability, and transformative power. Recognizing these manifestations enhances spiritual awareness and devotion.
🌱 जीवन के लिए शिक्षाएँ (Life Lessons)
🔸 हिंदी में
भगवान सभी शक्तियों और प्राकृतिक तत्वों में व्याप्त हैं
संहार, निर्माण और परिवर्तन की शक्ति ईश्वर में है
संपत्ति और संसाधनों की वास्तविक शक्ति भगवान से है
ऊर्जा, शक्ति और स्थिरता में ईश्वर का सर्वोच्च स्थान है
प्रकृति में ईश्वर की उपस्थिति को जानकर भक्ति और श्रद्धा बढ़ती है
🔸 In English
God is present in all cosmic and natural forces
Power of creation, destruction, and transformation lies in God
True wealth and resources are from God
Energy, strength, and stability are supreme in God
Recognizing God in nature enhances devotion and reverence
🔔 निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद गीता अध्याय 10 श्लोक 23
भगवान की दिव्य शक्ति और प्राकृतिक तत्वों में सर्वोच्चता का उद्घाटन करता है।
रुद्र, यक्ष, वसु और पर्वतों में उनकी उपस्थिति सर्वोच्च है
भगवान सभी प्राकृतिक, आध्यात्मिक और भौतिक शक्तियों के स्रोत हैं
यही विभूति योग का सार – ईश्वर की सर्वव्यापकता और भक्ति के माध्यम से उनके अनुभव का मार्ग
यह श्लोक भक्तों को सृष्टि में ईश्वर की उपस्थिति और शक्ति को समझने की प्रेरणा देता है।