श्लोक 21
🕉️ संस्कृत श्लोक (देवनागरी)
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः ।
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् ॥21॥
🔤 IAST Transliteration
trividhaṁ narakasya edaṁ dvāraṁ nāśanam ātmanaḥ |
kāmaḥ krodhas tathā lobhas tasmād etat trayaṁ tyajet ||21||
🇮🇳 हिंदी अनुवाद
हे आत्मा! नरक के लिए तीन प्रमुख द्वार हैं – काम, क्रोध और लोभ।
इसलिए इन्हें त्याग देना चाहिए।
🇬🇧 English Translation
O soul! There are three gates to hell: desire, anger, and greed.
Therefore, one must abandon these three.
🧠 विस्तृत हिंदी व्याख्या
श्लोक 21 में श्रीकृष्ण ने नरक और आत्मा के पतन के तीन प्रमुख कारणों को स्पष्ट किया है।
यह श्लोक हमें चेतावनी देता है कि काम, क्रोध और लोभ जीवन को अशुद्ध और पतित बनाते हैं।
1️⃣ त्रिविधं नरकस्येदं — नरक के तीन द्वार
काम (Desire): अति इच्छाएँ और कामनाएँ व्यक्ति को मोह और अहंकार में फंसा देती हैं।
क्रोध (Anger): क्रोध और राग से मन अशांत और हिंसक बनता है।
लोभ (Greed): अत्यधिक लालच और धन-संपत्ति की लालसा जीवन को पतित करती है।
2️⃣ नाशनमात्मनः — आत्मा के नाश का कारण
ये तीन दोष मन और आत्मा दोनों को नष्ट करते हैं।
अहंकार, मोह और वासनाएँ व्यक्ति को अशुभ कर्मों और अधम मार्ग की ओर ले जाती हैं।
3️⃣ त्यजेत् — त्याग का महत्व
श्रीकृष्ण स्पष्ट करते हैं कि संसार में स्थायी सुख और मोक्ष प्राप्त करने के लिए इन तीनों का त्याग अनिवार्य है।
यह त्याग सच्चे ज्ञान, संयम और दैवी गुणों की ओर ले जाता है।
🔑 श्लोक का संदेश
श्रीकृष्ण इस श्लोक में यह स्पष्ट करते हैं कि काम, क्रोध और लोभ:
नरक के द्वार हैं
आत्मा के नाश और पतन का कारण हैं
इन्हें छोड़कर ही दैवी जीवन, नैतिकता और मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है
🌍 Detailed English Explanation
Verse 21 highlights the three gateways to hell:
Desire (Kama): Excessive craving and attachment lead to illusion and ego.
Anger (Krodha): Uncontrolled anger disrupts peace and harms others.
Greed (Lobha): Insatiable greed and attachment to wealth degrade morality.
Krishna advises abandoning these three gateways to prevent spiritual destruction and attain true liberation.
🌱 जीवन के लिए सीख (Life Lessons)
✅ हिंदी में
काम, क्रोध और लोभ नरक के प्रमुख द्वार हैं
इन दोषों का पालन आत्मा और जीवन दोनों के लिए हानिकारक है
संयम, विवेक और दैवी गुण अपनाकर ही मोक्ष प्राप्त होता है
निरंतर आत्म-नियंत्रण और त्याग जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है
✅ In English
Desire, anger, and greed are the primary gateways to hell
Following these vices harms both soul and life
Discipline, discernment, and divine qualities lead to liberation
Continuous self-control and renunciation pave the path to spiritual progress
🕯️ निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद्गीता अध्याय 16 श्लोक 21 यह स्पष्ट करता है कि काम, क्रोध और लोभ आत्मा के नाश और नरक के मार्ग हैं।
श्रीकृष्ण हमें बताते हैं कि इन तीनों का त्याग करना ही सच्चे जीवन और मोक्ष का मार्ग है।
🌸 काम, क्रोध और लोभ से मुक्त हों—सच्चे जीवन और मोक्ष की ओर बढ़ें।