Tuesday, June 16, 2026

⚖️ शास्त्रविधि का पालन और सिद्धि: भगवद्गीता अध्याय 16 श्लोक 23 का संदेश 📖 भगवद्गीता अध्याय 16 – दैवासुरसम्पद्विभागयोग


श्लोक 23


🕉️ संस्कृत श्लोक (देवनागरी)

यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः ।
न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम् ॥23॥


🔤 IAST Transliteration

yaḥ śāstra-vidhim utsṛjya vartate kāma-kārataḥ |
na sa siddhim avāpnoti na sukhaṁ na parāṁ gatim ||23||


🇮🇳 हिंदी अनुवाद

जो व्यक्ति शास्त्रों के नियमों का त्याग करके केवल काम और इच्छाओं के पीछे चलता है,
वह न सिद्धि प्राप्त कर पाता है, न सुख पाता है, और न परम लक्ष्य (मोक्ष) तक पहुँच पाता है।


🇬🇧 English Translation

One who disregards the rules of the scriptures and acts driven by desire,
neither attains perfection, nor happiness, nor the supreme goal.


🧠 विस्तृत हिंदी व्याख्या

श्लोक 23 में श्रीकृष्ण ने यह स्पष्ट किया कि शास्त्रों और धर्म के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
यह श्लोक बताता है कि काम, क्रोध और लोभ में लिप्त व्यक्ति न तो सच्ची सफलता प्राप्त कर सकता है और न मोक्ष।


1️⃣ शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते — शास्त्रों का उल्लंघन

  • शास्त्र और धर्म के नियम जीवन और कर्म के मार्गदर्शन का स्रोत हैं।

  • यदि व्यक्ति उन्हें छोड़कर केवल काम और इच्छाओं का पालन करता है, तो उसका जीवन असंतुलित और अशुद्ध हो जाता है।


2️⃣ कामकारतः — इच्छाओं के पीछे दौड़ना

  • केवल भौतिक सुख, लालच और काम के पीछे भागना व्यक्ति को आध्यात्मिक दृष्टि से पतित बनाता है।

  • यह प्रवृत्ति सत्य, नैतिकता और शांति को बाधित करती है।


3️⃣ न सिद्धि, न सुख, न परां गतिम्

  • ऐसा व्यक्ति जीवन में सफलता और संतोष नहीं पाता

  • वह परम लक्ष्य (मोक्ष) से भी दूर रहता है।

  • इसलिए शास्त्र और धर्म का पालन आवश्यक है।


🔑 श्लोक का संदेश

श्रीकृष्ण इस श्लोक में यह स्पष्ट करते हैं कि शास्त्र का पालन और इच्छाओं पर नियंत्रण जीवन में सफलता, सुख और मोक्ष की कुंजी हैं।

  • केवल कामों और वासनाओं के पीछे दौड़ना जीवन को अधूरा और पतित बनाता है।


🌍 Detailed English Explanation

Verse 23 emphasizes the importance of following scriptural guidance:

  • Scriptures provide moral, ethical, and spiritual guidance.

  • One who abandons them to pursue desires and pleasures is misled.

  • Krishna warns that such a person attains neither true happiness nor perfection nor liberation (moksha).

This teaches that self-discipline, adherence to dharma, and scriptural knowledge are essential for spiritual and material fulfillment.


🌱 जीवन के लिए सीख (Life Lessons)

✅ हिंदी में

  • शास्त्र और धर्म का पालन सफलता और मोक्ष की कुंजी है

  • केवल काम और इच्छाओं के पीछे भागना जीवन को पतित बनाता है

  • संयम, विवेक और धार्मिक कर्म अपनाना आवश्यक है

  • सच्चा सुख, सिद्धि और परम लक्ष्य केवल अनुशासन और धर्मपालन से प्राप्त होता है

✅ In English

  • Following scriptures and dharma is key to success and liberation

  • Pursuing only desires and pleasures leads to downfall

  • Discipline, discernment, and righteous actions are necessary

  • True happiness, perfection, and the supreme goal are attained through adherence to dharma


🕯️ निष्कर्ष (Conclusion)

भगवद्गीता अध्याय 16 श्लोक 23 यह स्पष्ट करता है कि शास्त्रों और धर्म का पालन करना अत्यावश्यक है।
श्रीकृष्ण हमें बताते हैं कि काम, क्रोध और लोभ में लिप्त व्यक्ति न तो सच्चा सुख पाता है और न परम लक्ष्य

🌸 शास्त्र और धर्म का पालन करें—सच्चे जीवन और मोक्ष की ओर बढ़ें।


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