श्लोक 17
🕉️ संस्कृत श्लोक (देवनागरी)
रजस्तमं कर्मासक्तः प्रपद्यते भयं तथा ।
कामार्थसङ्कल्पं तु मूढः क्रियते नरकं प्रति ॥17॥
🔤 IAST Transliteration
rajas-tamaṁ karmāsaktaḥ prapadyate bhayaṁ tathā |
kāmārtha-saṅkalpaṁ tu mūḍhaḥ kriyate narakaṁ prati ||17||
🇮🇳 हिंदी अनुवाद
रजस और तामस गुणों से प्रेरित कर्म में आसक्ति होती है और वह भय उत्पन्न करता है।
मूढ़ व्यक्ति केवल काम और स्वार्थ के लिए कर्म करता है, और उसका अंत नरक की ओर जाता है।
🇬🇧 English Translation
An individual attached to rajasic-tamasic actions experiences fear.
The ignorant perform deeds driven solely by desire and selfish motives, which lead to hell.
🧠 विस्तृत हिंदी व्याख्या
श्लोक 17 में श्रीकृष्ण ने रजस-तामस कर्मों के नतीजे पर प्रकाश डाला है।
यह श्लोक बताता है कि स्वार्थ और कामनाओं से प्रेरित कर्म केवल भय और दुःख उत्पन्न करते हैं।
1️⃣ रजस्तमं कर्मासक्तः
रजस-तामस कर्म: लालच, कामना, अहंकार और अज्ञान से प्रेरित कर्म
ऐसे कर्म में आसक्ति (attachment) और भावनात्मक अशांति होती है
व्यक्ति धर्म, नैतिकता और स्थिर मानसिकता से दूर रहता है
2️⃣ भय और नरक की ओर प्रवृत्ति
असत्य और स्वार्थ से प्रेरित कर्म भय, चिंता और मानसिक तनाव उत्पन्न करते हैं
मूढ़ व्यक्ति केवल काम और स्वार्थ के लिए कर्म करता है, उसे सही मार्ग का ज्ञान नहीं होता
ऐसे कर्मों का परिणाम नरक और दुःख की ओर जाता है
🔑 श्लोक का संदेश
कर्म का गुण और उद्देश्य ही उसका परिणाम तय करता है
स्वार्थ और कामनाओं से प्रेरित कर्म भय और दुःख उत्पन्न करते हैं
सच्चा लाभ और मोक्ष सात्विक और निःस्वार्थ कर्मों से प्राप्त होता है
🌍 Detailed English Explanation
Verse 17 explains the consequences of rajasic-tamasic actions:
Actions motivated by desire, selfishness, and ignorance are rajasic-tamasic
Such actions create attachment, fear, and mental unrest
Ignorant individuals performing deeds only for personal gain or pleasure move toward unfavorable karmic consequences, including hell
Krishna emphasizes that true spiritual benefit comes from selfless, sattvic actions
🌱 जीवन के लिए सीख (Life Lessons)
✅ हिंदी में
स्वार्थ और लालच से प्रेरित कर्म भय और दुःख पैदा करते हैं
केवल काम और इच्छाओं के लिए किए गए कर्म मनुष्य को नरक की ओर ले जाते हैं
निःस्वार्थ और सात्विक कर्म ही सच्ची शांति और मोक्ष दिलाते हैं
✅ In English
Actions driven by selfish desires lead to fear and suffering
Deeds performed only for personal gain or pleasure result in adverse karmic consequences
Selfless and sattvic actions lead to true peace and liberation
🕯️ निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद्गीता अध्याय 17 श्लोक 17 यह स्पष्ट करता है कि रजस-तामस कर्म भय और दुःख उत्पन्न करते हैं और मूढ़ व्यक्ति को नरक की ओर ले जाते हैं।
श्रीकृष्ण हमें बताते हैं कि सच्चा मार्ग केवल सात्विक और निःस्वार्थ कर्मों के माध्यम से प्राप्त होता है।
🌸 स्वार्थ और कामनाओं से दूर रहें, भय और दुःख से मुक्त रहें, और सात्विक कर्मों का पालन करें।
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