श्लोक 5
🕉️ संस्कृत श्लोक (देवनागरी)
दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता ।
मा शुचः सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव ॥5॥
🔤 IAST Transliteration
daivī sampad vimokṣāya nibandhāyāsurī matā |
mā śucaḥ sampadaṁ daivīm abhijāto’si pāṇḍava ||5||
🇮🇳 हिंदी अनुवाद
दैवी संपदा मोक्ष के लिए मानी गई है और आसुरी संपदा बंधन के लिए।
हे पाण्डव! शोक मत करो, तुम दैवी संपदा में जन्मे हो।
🇬🇧 English Translation
The divine nature leads to liberation, while the demoniac nature causes bondage.
Do not grieve, O Pandava, for you are born with divine qualities.
🧠 विस्तृत हिंदी व्याख्या
भगवद्गीता अध्याय 16 के श्लोक 1 से 4 तक श्रीकृष्ण ने दैवी और आसुरी गुणों का स्पष्ट वर्णन किया।
अब श्लोक 5 में वे उन गुणों का अंतिम निष्कर्ष (Conclusion of the Comparison) प्रस्तुत करते हैं।
यह श्लोक केवल दर्शन नहीं, बल्कि जीवन का निर्णायक सूत्र है।
🔑 दैवी संपदा = मोक्ष का मार्ग
श्रीकृष्ण स्पष्ट कहते हैं—
दैवी संपदा मोक्ष के लिए है।
दैवी गुण जैसे—
अभय
अहिंसा
सत्य
दया
क्षमा
विनम्रता
ज्ञान
👉 ये सभी गुण आत्मा को बंधन से मुक्त करते हैं।
दैवी व्यक्ति:
अहंकार से ऊपर उठता है
कर्मों को ईश्वर को अर्पित करता है
फल की चिंता छोड़ देता है
यही स्थिति मोक्ष की ओर ले जाती है।
⛓️ आसुरी संपदा = बंधन का कारण
श्रीकृष्ण यह भी कहते हैं—
आसुरी संपदा बंधन के लिए मानी गई है।
आसुरी गुण जैसे—
दम्भ
अहंकार
क्रोध
कठोरता
अज्ञान
👉 ये गुण व्यक्ति को:
कर्मबंधन में जकड़ते हैं
जन्म-मृत्यु के चक्र में फँसाते हैं
दुःख और अशांति बढ़ाते हैं
📌 आसुरी जीवन में स्वतंत्रता नहीं, केवल वासनाओं की गुलामी होती है।
🌼 “मा शुचः” — शोक मत करो
यह श्लोक अर्जुन के लिए ही नहीं, हर साधक के लिए आश्वासन है।
श्रीकृष्ण कहते हैं—
हे पाण्डव! शोक मत करो।
अर्थात:
तुम्हारे भीतर दैवी गुण हैं
तुम सही मार्ग पर हो
तुम्हें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं
यह वाक्य आध्यात्मिक आत्मविश्वास का संचार करता है।
🌱 “अभिजातोऽसि” — दैवी जन्म का अर्थ
यह जन्म शारीरिक नहीं, बल्कि—
👉 संस्कारों, विवेक और चेतना का जन्म है।
जो व्यक्ति:
सत्य की खोज करता है
धर्म के पक्ष में खड़ा होता है
आत्मिक उन्नति चाहता है
वह दैवी संपदा में जन्मा हुआ कहलाता है।
🌍 Detailed English Explanation
Verse 5 serves as the core message of Chapter 16.
Krishna summarizes the entire distinction in one powerful statement:
Divine qualities liberate the soul
Demonic qualities bind the soul
Liberation (Moksha) comes from selflessness, wisdom, and purity.
Bondage arises from ego, ignorance, and desire.
By telling Arjuna “Do not grieve”, Krishna instills confidence and removes doubt—
a reminder that spiritual orientation matters more than past actions.
🌱 जीवन के लिए सीख (Life Lessons)
✅ हिंदी में
दैवी गुण जीवन को मुक्त करते हैं
आसुरी प्रवृत्तियाँ दुःख का कारण बनती हैं
आत्मविश्वास आध्यात्मिक प्रगति की कुंजी है
सही मार्ग चुनना ही सच्ची विजय है
✅ In English
Divine qualities lead to freedom
Ego and ignorance create bondage
Inner confidence accelerates spiritual growth
Conscious choices define destiny
🕯️ निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद्गीता अध्याय 16 श्लोक 5 हमें यह स्पष्ट रूप से सिखाता है कि
👉 मोक्ष या बंधन कोई भाग्य नहीं, बल्कि गुणों का परिणाम है।
यदि हम दैवी गुणों को अपनाते हैं,
तो श्रीकृष्ण स्वयं हमें आश्वस्त करते हैं—
🌸 “मा शुचः”—डरो मत, तुम सही मार्ग पर हो।