Friday, May 22, 2026

✅ 🌟 “गुणों से परे परम तत्व का ज्ञान – गीता अध्याय 14 श्लोक 19” 📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 14 (गुणत्रय-विभाग योग), श्लोक 19


🕉️ संस्कृत श्लोक (Devanagari)

नान्यं गुणेभ्यः कर्तारं यदा द्रष्टानुपश्यति ।
गुणेभ्यश्च परं वेत्ति मद्भावं सोऽधिगच्छति ॥19॥


🔤 IAST Transliteration

nānyaṁ guṇebhyaḥ kartāraṁ yadā draṣṭānu-paśyati |
guṇebhyaś ca paraṁ vetti mad-bhāvaṁ so ’dhigacchati ||19||


📜 हिंदी अनुवाद

जब कोई व्यक्ति तीनों गुणों से परे स्थित परम कर्ता और स्वयं परम तत्व को देखता और समझता है,
तो वह मेरा (भगवान का) वास्तविक स्वरूप जानकर मेरी प्राप्ति करता है।


📘 English Translation

When a person sees the supreme doer beyond the three modes of nature (gunas) and understands Him,
he attains Me, the Supreme Being, beyond all material qualities.


🧠 विस्तृत हिंदी व्याख्या

इस श्लोक में श्रीकृष्ण बताते हैं कि सत्त्व, रजस और तमस के पार कैसे परमात्मा का अनुभव होता है:

  1. गुणों से परे दृष्टि

    • व्यक्ति जब केवल गुणों (सत्त्व, रजस, तमस) में बंधा नहीं रहता, बल्कि उनके पार देखने की क्षमता विकसित करता है, तो वह परम तत्व को समझ सकता है।

  2. कर्त्ता का ज्ञान

    • यह व्यक्ति पहचानता है कि संसार में होने वाली क्रियाएँ केवल तीन गुणों के प्रभाव से नहीं, बल्कि मेरे (भगवान) नियंत्रण से होती हैं।

  3. परम प्राप्ति

    • गुणों के बंधन से मुक्त होकर जो व्यक्ति भगवान के स्वरूप और मेरी भक्ति में स्थिर रहता है, वह सच्चे आध्यात्मिक लक्ष्य को प्राप्त करता है

यह श्लोक हमें स्पष्ट रूप से यह शिक्षा देता है कि सिर्फ कर्म और गुणों में उलझकर व्यक्ति मोक्ष या परमात्मा की प्राप्ति नहीं कर सकता। इसके लिए उसे गुणों से ऊपर उठकर आत्मा और भगवान के परम स्वरूप का अनुभव करना आवश्यक है।


🌍 Detailed English Explanation

Krishna explains how a soul can transcend the three modes of nature:

  • By seeing beyond sattva, rajas, and tamas, one recognizes the supreme doer behind all actions.

  • Such a person understands that the material qualities govern the world, but the Supreme Being orchestrates everything.

  • By transcending the gunas and focusing on devotion and awareness of the divine, the soul attains union with God and ultimate spiritual realization.

This emphasizes that true liberation comes from rising above the gunas and connecting directly with the Supreme Consciousness.


🌱 जीवन के लिए सीख / Life Lessons

📌 हिंदी में

  • गुणों से परे देखने की क्षमता विकसित करें

  • परमात्मा को तीनों गुणों से परे पहचानें

  • सत्त्व, रजस और तमस के बंधनों में न फँसें

  • भगवान के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान ही मोक्ष का मार्ग है

  • भक्ति और ज्ञान से आत्मा को ऊँचा उठाएँ

📌 In English

  • Develop the ability to see beyond the gunas

  • Recognize the Supreme Being beyond sattva, rajas, and tamas

  • Do not remain trapped in material qualities

  • Knowledge of God’s true form leads to liberation

  • Elevate the soul through devotion and wisdom


🔔 निष्कर्ष / Conclusion

गीता अध्याय 14 का यह श्लोक स्पष्ट करता है कि तीनों गुणों से परे जाकर परमात्मा का अनुभव करना ही सच्ची आध्यात्मिक प्राप्ति है।

सच्ची उन्नति तब संभव है जब हम गुणों का ज्ञान रखते हुए उन्हें पार कर भगवान की भक्ति और आत्मा के ज्ञान में स्थित हों।



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✅ 🌟 “गुणों से परे परम तत्व का ज्ञान – गीता अध्याय 14 श्लोक 19” 📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 14 (गुणत्रय-विभाग योग), श्लोक 19

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