📜 संस्कृत श्लोक (Devanagari)
सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः ।
मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम् ॥56॥
🔤 IAST Transliteration
sarvakarmāṇy api sadā kurvāṇo mad-vyapāśrayaḥ |
mat-prasādād avāpnoti śāśvataṃ padam avyayam || 18.56 ||
🪔 हिंदी अनुवाद
जो व्यक्ति सभी कर्मों को करता है लेकिन मुझमें (भगवान) आश्रित रहता है,
उसके लिए मेरी कृपा द्वारा वह शाश्वत और अविनाशी पद प्राप्त करता है।
🌍 English Translation
One who performs all actions while taking refuge in Me (the Lord),
by My grace, attains the eternal and imperishable position.
🧠 विस्तृत हिंदी व्याख्या (Detailed Hindi Explanation)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कर्म में ईश्वर पर निर्भरता और शाश्वत स्थिति प्राप्ति का मार्ग बता रहे हैं।
🔸 “सर्वकर्माणि अपि सदा कुर्वाणः”
व्यक्ति सभी आवश्यक कर्म करता है
कर्म करना जीवन का नियम है, पर निष्काम और ईश्वर में विश्वास के साथ करना आवश्यक है
यह कर्मयोग का मूल है: कर्म करें, फल की इच्छा त्यागें
🔸 “मद्व्यपाश्रयः”
ईश्वर में आश्रय: हर कर्म और निर्णय में भगवान का स्मरण
यह निर्भयता और आध्यात्मिक शक्ति देता है
आश्रय लेने वाला व्यक्ति फल की चिंता से मुक्त रहता है
🔸 “मत्प्रसादात् अवाप्नोति”
भगवान की कृपा से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से समृद्ध होता है
इस कृपा के बिना कोई कर्म पूर्ण लाभ नहीं देता
कृपा प्राप्ति का आधार है भक्ति, समर्पण और कर्मयोग
🔸 “शाश्वतं पदम् अव्ययम्”
शाश्वत = स्थायी, अनंत
अव्यय = कभी नष्ट न होने वाला
यह मोक्ष, आत्मा की शाश्वत स्थिति और परमात्मा में एकीकरण का प्रतीक है
🔸 आधुनिक जीवन में संदेश
आज:
लोग अक्सर स्वयं पर निर्भर होकर कर्म करते हैं और तनाव में रहते हैं
गीता सिखाती है कि कर्म करते समय भगवान का स्मरण और आश्रय जीवन को शांत और फलदायक बनाता है
यह शाश्वत अवस्था आध्यात्मिक स्थिरता और अनंत शांति का मार्ग है
यह श्लोक कर्मयोग, भक्ति और ईश्वर आश्रय का सर्वोच्च सूत्र है।
🌱 Detailed English Explanation
This verse highlights the importance of performing actions while depending on God and attaining the eternal state.
🔹 Key Points
Perform all actions (Sarvakarmany api sada kurvano)
Engage in daily duties with dedication
Do not abandon responsibilities; perform karma selflessly
Take refuge in God (Mad-vyapashrayaḥ)
Depend on the Lord in all actions and decisions
Provides courage, clarity, and freedom from attachment to results
By My grace (Mat-prasadaat avapnoti)
God’s blessings empower the devotee
Divine grace ensures spiritual success and progress
Attain the eternal and imperishable (Shashvatam padam avyayam)
Represents liberation (Moksha) and eternal union with the Divine
The goal of life and ultimate spiritual fulfillment
🔹 Modern Relevance
People often rely solely on their own effort and face stress
Gita teaches: perform actions while taking refuge in God for inner peace and ultimate benefit
Such a path leads to permanent spiritual stability and bliss
🌼 जीवन के लिए शिक्षाएँ (Life Lessons)
🪔 हिंदी जीवन-पाठ
कर्म करना जारी रखें
जीवन में सभी जिम्मेदारियाँ ईमानदारी से निभाएँ।
ईश्वर में आश्रय रखें
हर काम में भगवान का स्मरण और विश्वास रखें।
कृपा का महत्व समझें
सफलता और आध्यात्मिक लाभ भगवान की कृपा से ही संभव है।
शाश्वत लक्ष्य की ओर बढ़ें
सांसारिक सुख-dukha में न उलझें; मोक्ष और आत्मिक शांति को लक्ष्य बनाएं।
कर्म + भक्ति = परम स्थिति
सभी कर्मों को भक्ति भाव से करने वाला व्यक्ति शाश्वत और अविनाशी स्थिति प्राप्त करता है।
🌿 English Life Lessons
Continue performing duties
Carry out responsibilities sincerely and diligently.
Take refuge in God
Depend on the Divine in all actions for guidance and peace.
Understand the role of grace
Spiritual success comes through divine grace, not just effort.
Aim for the eternal
Focus on Moksha and eternal spiritual bliss, not transient material gains.
Karma + Bhakti = Supreme Position
One who performs all actions with devotion attains the eternal and imperishable state.
🔔 आधुनिक जीवन में श्लोक 18.56 की प्रासंगिकता
आज के समय में:
लोग अपने कर्मों और प्रयासों पर ही पूरी तरह निर्भर रहते हैं
गीता सिखाती है कि भक्ति, ईश्वर में आश्रय और कर्मयोग के माध्यम से ही जीवन स्थिर और सार्थक बनता है
इस प्रकार व्यक्ति अनंत शांति, आध्यात्मिक उन्नति और शाश्वत स्थिति प्राप्त करता है
गीता का संदेश है:
जो व्यक्ति सभी कर्म करता है और ईश्वर में आश्रय लेता है, वही शाश्वत और अविनाशी स्थिति प्राप्त करता है।
🧘♂️ निष्कर्ष (Conclusion)
भगवद गीता का यह श्लोक स्पष्ट करता है कि:
कर्म करना आवश्यक है, लेकिन ईश्वर में विश्वास और आश्रय के बिना वह पूर्ण नहीं होता
भगवान की कृपा से ही व्यक्ति शाश्वत और अविनाशी स्थिति प्राप्त करता है
कर्मयोग और भक्ति का यह मार्ग जीवन को संतुलित, स्थिर और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है
जो व्यक्ति सभी कर्म करता है और ईश्वर में आश्रय रखता है, वही शाश्वत और अविनाशी स्थिति प्राप्त करता है।